Saturday, August 9, 2014

उत्तराखंड के रंग

वो हिमालय के परबत ऊँचे,
वो देओदार के पेड़ घने।

चोटियों पे है जहां सफ़ेद बर्फ छाई,
पेड़ छू रहे आसमानो की ऊंचाई।

फूलों से सजा है ये सारा चमन,
गुनगुना रहे भंवरे रस में होके मगन।

बर्फ से ढंका हो जहां हर पथ,
पूरी हो मन की जहां हर मनोरथ।

उमड़ पड़ते हो बादल होके सघन,
देखते ही तीर्थ पावन होते ये नयन।

उदय हो जहां सोने का सूरज,
पंखुड़ी फैलाये उगे जहाँ कई नीरज।

सुनाई दे जहाँ बहते झरनो की कल कल,
छिपे हो परबत जहाँ बादलो से हर पल।

उत्तराखंड की ऐसी छटा न्यारी,
उसकी रौनक देख धरती भी आज मुस्कुराई।


© २०१४ अभिजीत पंडित