Monday, September 10, 2012

चांदनी रात में

कभी एक चांदनी रातमें, युही चलते चलते कही अकेले,
हवाका एक झोंका छू कर गुज़र गया.
चला गया देख मुझे अकेला,
किसी और मंजिल की ओर,
उस हवाके झोंकेमें महसूस किया है तुझे मैंने.

मेहसूस किया है, तेरी रुख से गिरी हुई उन जुल्फों को,
जो कभी लिपट जाती थी मेरी बाहों से,
पेड़की टहनीओ सी पड़ी रहती थी युही कभी,
कभी सरक जाती थी उन बाहों से, देख मेरी मस्त निगाहें,
उन जुल्फों को याद कर, उडती हुई खुशबू को महसूस किया है मैंने.

सर्द हवा जब ले आई थी
कुछ सूखे हुए, बेजान पत्तो को मेरी ओर.
साथमें आये थे कुछ कागज़ के टुकड़े.
वो पत्ते जो कभी हिस्सा थे एक पेड़ की शाख के,
वो टुकड़े जिसपे लिखे गए थे कई अलफ़ाज़ दिल के,
जिसपे बिखर गए थे कई सपने,
उन टुकड़ों को देख, तेरा इंतज़ार महसूस किया है मैने.


© 2012 Abhijit Pandit